सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के जीवन में एक दिन

सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के जीवन में एक दिन ग्रामीण राजस्थान में, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता नई भूमिकाओं को अपना रहे हैं – वह है महामारी से जुड़ी भ्रांतियों और लॉकडाउन से जुड़े भय को दूर कर रहे है | मैं राजस्थान के उदयपुर जिले के एक गाँव मातासुला में रहती हूँ| मैं एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में बेसिक हेल्थकेयर सर्विसेज (BHS) के साथ काम करती हूं, ताकि स्थानीय समुदायों के लोगों के बीच स्वास्थ्य और पोषण के बारे में जागरूकता पैदा कर सकूं। मैं 2014 से BHS के साथ जुड़ी हूँ और पिछले आठ महीनों से मानपुर क्लिनिक में कार्यरत हूँ। मेरे अलावा, सिस्टर (नर्स), भैया (एक पुरुष सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, जो पुरुषों के साथ अधिक निकटता से बातचीत करते हैं), बाईजी (क्लीनर), और एक अन्य वरिष्ठ स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी क्लिनिक में कार्यरत हैं। COVID-19 से पहले, मैं आमतौर पर प्रत्येक दिन की शुरुआत में फ़ील्ड (कार्यक्षेत्र) में बाहर निकलती थी, लेकिन अब लॉकडाउन के कारण, हम फ़ील्ड (कार्यक्षेत्र) में कम ही जाते हैं। आजकल, हम क्लिनिक में अधिकतर समय सिस्टर की मदद करते हुए बिताते है। हम मरीजों से उनकी यात्रा की हिस्ट्री के बारे में पूछते हैं कि क्या उनके घर या गांव में कोई भी व्यक्ति कहीं बाहर से लौटा है, और घर पर क्या स्थिति है। लॉकडाउन से पहले, सिस्टर और वरिष्ठ स्वास्थ्य कार्यकर्ता फ़ील्ड (कार्यक्षेत्र) में प्रसव पूर्व देखभाल (एंटी नेटल केयर) और प्रसवोत्तर देखभाल (पोस्ट नेटल केयर) का कार्य किया करते थे। वे इन महिलाओं को आयरन और कैल्शियम सप्लीमेंट देते थे, और काउंसलिंग सेशन आयोजित करते थे। अब ऐसा कुछ भी नहीं हो सकता है। हम फोन पर कुछ माताओं के साथ बात करते हैं, और उन्हें सलाह देते हैं कि उन्हें किन गोलियों और सावधानियों को लेने की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन हम समूह सत्र आयोजित नहीं कर सकते हैं और पहले हम जितनी महिलाओं तक पहुँच सकते थे, अब ऐसा नहीं कर सकते हैं। मैं एक फुलवारी1 सुपरवाइज़र भी हूं, लेकिन अब जब फुलवारी बंद हो गई है, तो हम पहले जो काम किया करते थे, वह काम अब नहीं कर सकते है, जैसे कि बच्चों का वजन करना और कुपोषित बच्चों की पहचान करना। हालांकि, …

प्राथमिक स्वास्थ्य में मेरा नर्सिंग का सफ़र : नामुम्किन कुछ भी नहीं !

प्राथमिक स्वास्थ्य में मेरा नर्सिंग का सफ़र : नामुम्किन कुछ भी नहीं ! धीरज जैन , नर्स मेंटर , बेसिक हेल्थ केयर सर्विसेज- मैंने 14 साल पहले GNM की पढ़ाई पूरी की थी।  नर्सिंग में जुड़ने के लिए मेरे मामाजी ने प्रोत्साहित किया था जो ख़ुद एक नर्स है। उन्होंने …

A tale of two epidemics

A tale of two epidemics Today is world malaria day, recommitted to eliminating malaria from the world. In last one year, we witnessed and responded to a major outbreak of malaria across two tribal communities. These communities live in the catchment areas of our AMRIT Clinics, that aim to provide …

Covid-19 crisis: Shift focus from hospitals to primary care

Covid-19 crisis: Shift focus from hospitals to primary care Our colleague Dr Pavitra Mohan, and Dr Nachiket Mor argue for the need to focus on and strengthening primary care to manage the #COVID19 crisis. Click on the link to read full article. https://www.thehindubusinessline.com/opinion/covid-19-crisis-shift-focus-from-hospitals-to-primary-care/article31278485.ece?fbclid=IwAR2WFdAcX2st9523NN9KouKXMFyuVYKo0-ga2WCmSza4csD-yPb25fnZ0Zc

Coronavirus: Separating facts from hype

Coronavirus: Separating facts from hype With flood of articles, assumptions and theories doing rounds, there is a dire need for scientific evidence that informs decisions around tackling COVID19.Our colleagues Pavitra Mohan and Arpita Amin bring out a piece drawing in robust findings that separates facts from hypes around the disease. …

Three ways to combat coronavirus

Three ways to combat coronavirus Strengthening primary and community health care, combined with vastly expanded testing, will be key to overcoming the pandemic, as the lock-down provides some time. Click on the link below to read the full article by our colleagues. https://www.business-standard.com/article/current-affairs/three-ways-to-combat-coronavirus-120032801149_1.html?fbclid=IwAR1Jm_qjVOjhwO20gUNz2lm494frkqux2Xbo11hcwyfXGqtCeA2Ctw0d7FI#.XoBLNZewins.facebook